कल के जो बच्चे होंगे
वो किनके जैसे होंगे ?
जब खाने में होगी मिलावट
तो कैसी सेहत पाएंगे ?
जब सोच में होगी मिलावट
तो क्या शक्सियत पाएंगे ?
दौडेंगे भागेंगे पछतायेंगे
तबीयत मसोस के रह जाएँगे
माँबाप सिखायेंगे दुनिया का चलन
एक दूसरे की खाल नोचते जाएँगे
मुँह पर कुच्छ और मन में कुच्छ और
भावनाओ से खेलना बखूबी सीख जाएँगे
हाँ कुच्छ अच्छे इंसान भी बनेंगे
मगर इंसानियत की वेह्शत कहा तक झेल पाएंगे ?
सभी कहते है सौरभ इतना बुरा क्यों बोलते हो
ख़ुद बुरा न कर पाए बस औरों को उपदेश पढायेंगे ?
Her Master Key - Reflections
7 years ago
6 comments:
Very heart felt and intense compositions!Really .....
Observation: The tough times have made you really bitter which is not surprising. Use this platform to do some bit of self-catharsis to vent out the pain.
Suggestion: Time will heal all and so will the changed Times, after which please do attempt a couple of poems ringing happiness and contentment too.
Or else this blog will be incomplete leaving the readers in perpetual melancholy.
बहुत खूब
बहुत बढिया. लिखते रहें.
हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी टिप्पणियां दें
डर लगता है सौचता हूं बच्चे ही पैदा न करुं
Jo unkee qismat me hoga...wahee hoga!
Ham apnee taraf se jo kar sakte hain, karen...haina?
http://shamasansmaran.blogspot.com
http://aajtakyahantak-thelightbyalonelypath.com
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